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साहेबगंज में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी की अध्यक्षता में मासिक समीक्षा बैठक, बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर

बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर

साहेबगंज में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी की अध्यक्षता में मासिक समीक्षा बैठक, बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर

 

रिपोर्टर – उज्जवल कुमार साहा

बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एवं प्रायोजन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश जिले के प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, संरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने तथा बाल संरक्षण सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आज जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, साहेबगंज की अध्यक्षता में जिला बाल संरक्षण इकाई कार्यालय में मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

 

बैठक में जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य, चाइल्ड हेल्पलाइन (डीसीपीयू एवं रेलवे), सामाजिक कार्यकर्ता, बाल गृह, जिला समन्वयक C3, PCI (UNICEF) तथा अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान बाल संरक्षण से संबंधित विभिन्न बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने सभी संबंधित इकाइयों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक जरूरतमंद एवं पात्र बच्चे तक सरकारी योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं प्रभावी रूप से पहुँचाने के निर्देश दिए।

उन्होंने रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन, साहेबगंज के कर्मियों को बरहरवा रेलवे स्टेशन पर नियमित रूप से ड्यूटी करते हुए बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण से जुड़े मामलों पर विशेष सतर्कता एवं निगरानी बनाए रखने का निर्देश दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले प्रत्येक मामले के साथ परामर्श (काउंसलिंग) पत्र अनिवार्य रूप से संलग्न किया जाए।

बैठक में चाइल्ड हेल्पलाइन के सभी कर्मियों को उनके कार्य, दायित्व एवं उत्तरदायित्वों की विस्तार से जानकारी देते हुए बच्चों के सर्वोत्तम हित को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए संवेदनशीलता, तत्परता एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।

 

प्रायोजन (Sponsorship) योजना की समीक्षा के दौरान संरक्षण पदाधिकारी (गैर संस्थागत देखरेख), साहेबगंज को योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने तथा अधिक से अधिक पात्र बच्चों को योजना से जोड़ने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

 

बैठक में बताया गया कि प्रायोजन योजना की लाभ अवधि तीन वर्ष की होती है। इस योजना के प्रति आमजन में व्यापक जागरूकता फैलाने, पात्र बालक एवं बालिकाओं की पहचान कर आवश्यक दस्तावेज तैयार करने तथा बाल कल्याण समिति के माध्यम से उन्हें योजना का लाभ दिलाने हेतु विशेष अभियान चलाने पर बल दिया गया।

इसके अतिरिक्त सभी चाइल्ड हेल्पलाइन कर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बालक बाल गृह के संबंधित कर्मियों को अपने-अपने मामलों की विस्तृत केस स्टडी (Case Study) तैयार करने, अभिलेखों का नियमित एवं व्यवस्थित संधारण करने तथा प्रत्येक प्रकरण की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

 

 

बैठक के अंत में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी ने कहा कि बाल संरक्षण केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी संबंधित विभाग एवं संस्थाएं आपसी समन्वय, संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें, ताकि जिले का कोई भी पात्र बच्चा संरक्षण, शिक्षा, पुनर्वास एवं सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मियों से बाल हित सर्वोपरि की भावना के साथ कार्य करते हुए बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक सशक्त एवं जन-केंद्रित बनाने का आह्वान किया।

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