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Explained: क्या आपकी गाड़ी के इंजन को सड़ा रहा इथेनॉल, पेट्रोलियम मंत्री के बयान पर क्यों सोचें- ‘भराऊं या इंतजार करूं’?

इथेनॉल-Ethanol Controversy

Ethanol Controversy: अगर आपकी गाड़ी का फ्यूल सिस्टम इथेनॉल की वजह से खराब होता है तो इंश्योरेंस कंपनी दावा खारिज कर सकती है. यह कानूनी और वित्तीय जोखिम है, जबकि सरकार तेजी से E20 की तरफ बढ़ रही है.

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल पर बयान देकर पूरी बहस को फिर से तूल दे दिया. उन्होंने कहा कि E20 (20% इथेनॉल वाला पेट्रोल) के इस्तेमाल से गाड़ियों के माइलेज में ‘मामूली गिरावट’ आती है, लेकिन साथ ही विदेशी मुद्रा की बचत और पर्यावरण पर इसके फायदों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर कार-बाइक ऑनर्स के ग्रुप तक में सवालों की झड़ी लग गई कि क्या पेट्रोल का नया फॉर्मूला इंजन को चुपचाप खत्म कर रहा है, क्या आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस इथेनॉल से हुए नुकसान को कवर करेगा, वगैरह. तो आइए इसे एक्सप्लेनर में समझते हैं…

सबसे पहले E20 का पूरा गणित समझें

भारत सरकार 2025-26 तक पूरे देश में 20% इथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल लागू करने का टारगेट लेकर चल रही है. इथेनॉल गन्ने के रस, मकई या कुटे अनाज से बनता है. सरकार का तर्क है कि इससे हर साल करीब 30,000 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बचेगी, किसानों की आमदनी बढ़ेगी और कार्बन उत्सर्जन घटेगा. पुरी के मुताबिक, इथेनॉल मिक्स्ड के हर एक प्रतिशत बढ़ने पर लगभग 1,000 करोड़ रुपए का क्रूड ऑयल आयात कम होता है. यह फायदे का बड़ा आंकड़ा है.

 

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